गणेश

गणेश के कई अन्य नाम भी है, जैसे विनायक (ज्ञानी), विघ्नेश्वर (विघ्न का नाश करने वाले), गजानन (हाथी के मस्तक वाला) और गणपति (नेतृत्वकर्ता)। गणेश में नेतृत्व की क्षमता है, और ऐसा विश्वास है कि उनकी कृपा होने पर किसी भी काम में सफलता मिल जाती है।

झगणेशजी का हाथी का मस्तक उनकी तीव्र बुद्धि और विशाल चिंतन का प्रतीक है। हाथी का जीवन प्रफुल्लता से पूर्ण होता है, जो गरिमा और आत्म-सम्मान की भावना से आती है। हाथी भोजन करते समय सामग्री को अपने चारों ओर बिखेरता है। यह उसकी उदार भावना को व्यक्त करता है। उसके बड़े कान और मुँह हमें बताते हैं कि क्रमशः ‘अधिक सुनों, कम बोलो, और जो कुछ भी अच्छा एवं रचनात्मक हो, उसे ही अपने पास रखो।’ बड़े कान अपने गुरु की बातों को ध्यान से सुनने का भी अर्थ देते हैं। छोटी आँखों का अर्थ है-तीक्ष्ण दृष्टि, केन्द्रीयता तथा दूरदर्शिता। गणेश के दाँत उच्च शक्ति, कौशल एवं

ग्रहणशीलता के प्रतीक हैं। वे जहाँ अपने दाँतों से बड़ी से बड़ी बाधा को दूर कर सकते हंै, वहीं कोमल काम को भी बहुत ही सावधानी से कर सकते हैं। गणेश के बड़े दाँतों के और भी गहरे अर्थ लगाये जाते हैं। उनके छोटे दाँत बुद्धिमत्ता का, तो बड़े दाँत आस्था का प्रतीक माने जाते हैं। जीवन में उन्नति के लिए बुद्धिमत्ता और आस्था दोनों की आवश्यकता होती है। अक्सर बुद्धिमत्ता जीवन के ज्वलंत प्रश्नों के उत्तर देने में असमर्थ हो जाती है। जब भी ऐसा होता है, तब ईश्वर में एवं स्वयं में आस्था ही हमें सफल जीवन की ओर ले जाती है।

  • अंकुश- यह दर्शाता है कि हम स्वयं को हर प्रकार के मोह के बंधनों से अलग कर लें तथा अपनी इच्छाओं और भावनाओं को नियंत्रण में रखें।
  • पाश- यह संयम एवं दण्ड का प्रतीक है। इससे हम सत्य के निकट पहुँचते हैं।
  • मोदक- लड्डू ऊपर से कठोर किन्तु अंदर से मीठा और पौष्टिक होता है। इसका अर्थ है कि कठिन श्रम से आनंद, संतोष एवं आत्मा को खुराक मिलती है।
  • आशीर्वाद- यह इस तथ्य का संकेतक है कि गणेशजी का आशीर्वाद हमें आध्यात्मिक मार्ग पर आगे ले जाता है, और हमारी रक्षा करता है।

एक सम्पूर्ण व्यक्ति में यह गुण होना चाहिए कि वह अपने जीवन के समस्त अनुभवों को पचा सके। गणेशजी का बड़ा पेट जीवन की सारी अच्छी और बुरी बातों को पचाने में सक्षम है। वह भी बिना नियंत्रण खोये। उनके छोटे पैर संदेश देते हैं कि किसी भी काम के लिए हड़बड़ी में मत जाओ। हमारा प्रत्येक कदम धीमा अैर अच्छी तरह सोचा-समझा हुआ होना चाहिए।

सुगंधित भोजन सामग्री के पास बैठा हुआ मूषक (चूहा) गणेशजी के चरण की ओर देख रहा है। वह थोड़ा भयभीत है और गणेशजी की अनुमति के बिना किसी भी चीज को छूने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। हालांकि चूहा होता तो एक छोटा सा ही जीव है, और उसके दाँत भी छोटे ही होते हैं। लेकिन वह अपनी कुतरने की क्षमता के कारण विनाश ला सकता है। ठीक इसी तरह हम सभी के व्यक्तित्व के अंदर कामनारूपी चूहा रहता है, जो पर्वत जितने गुणों को भी कुतरकर खत्म कर सकता है। गणेशजी ने

चूहारूपी कामना की विध्वंसकारी शक्ति पर इस प्रकार नियंत्रण कर लिया है कि वह पूरी तरह से अपने स्वामी के आदेश के अनुसार काम करता है।