नटराज

नटराज का अर्थ है नृत्य का राजा या सर्वोत्तम नर्तक। नटराज के रूप में शिव को नृत्य करते हुए दिखाया जाता है। यह सृष्टि और संहार दोनों से संबद्ध परमानन्द का नृत्य है। यह सृष्टि और प्रलय के ब्रह्माण्डीय चक्र का प्रतीक है। मानवीय स्तर पर यह जीवन और मृत्यु तथा अन्यान्य परिवर्तनों का द्योतक है। इस नृत्य की मुद्रा प्रतीकात्मक रूप से प्रतिपल परिवर्तित और गतिमान् विश्व को अभिव्यक्त करती है। जो व्यक्ति इसके निहित अर्थ को समझ जाता है और नृत्य की लय के साथ नृत्य करता है वह समस्त सीमाओं से पार हो जाता है।

नटराज का प्रत्येक तत्त्व किसी न किसी माहात्म्य की ओर संकेत करता है-

  • उनकी मूर्ति अग्नि-ज्वालाओं से घिरी दिखाई जाती है जिनका तात्पर्य शिव की अनन्त चेतना से है जो विश्व के रूप में व्यक्त हो रही है। विश्व सक्रिय है, यह स्थायी नहीं है। इसका प्रत्येक अणु गतिमान है। शिव को चार भुजाओं के साथ दिखाया जाता है। ये चार भुजाएँ उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम - इन चार दिशाओं की प्रतीक हैं। प्रत्येक भुजा विशेष और पृथक् मुद्रा में है। ऊपर का दाँया हाथ डमरू धारण किये हुए है। प्रतीकात्मक दृष्टि से इस डमरू की ध्वनि सृष्टि के समय होने वाली ब्रह्माण्डीय लय को सूचित करती है। ऊपर का बाँया हाथ एक ज्वाला को धारण किए हुए है। यह ज्वाला उस शक्ति को ध्वनित करती है जिसमें समय के साथ प्रत्येक वस्तु लीन हो जाती है। दो विपरीत अवधारणाओं की ओर संकेत करने वाले ऊपरी दोनों हाथ सृष्टि और संहार के प्रति संतुलन को दर्शाते हैं।
  • नीचे का दाँया हाथ अभय मुद्रा में है जो बताता है कि व्यक्ति को लगातार अपने आसपास हो रहे परिवर्तन से घबराना नहीं चाहिए। नीचे का बाँया हाथ बायें पैर की ओर इशारा कर रहा है जो कि रमणीयता के साथ कुछ ऊपर उठा हुआ है और उत्कर्ष एवं मोक्ष का प्रतिनिधि है।
  • नटराज के सिर पर एक मुण्ड है जो मृत्यु के ऊपर शिव की विजय का प्रतीक है। उनकी तीसरी आँख सर्वज्ञता, अंतर्दृष्टि और बोध की प्रतीक है। यह संपूर्ण आकृति एक कमलाकृति पीठ पर रखी हुई है जो विश्व की क्रियात्मक शक्तियों का प्रतीक है। नटराज की संपूर्ण मनोदशा स्वभाव से विरोधाभासी है - आंतरिक गहन शांति और बाहरी सशक्त गतिविधियों से संपन्न। शिव की संयमी मुख मुद्रा उनकी निष्पक्षता दर्शाती है जो अतीव संतुलन की स्थिति है। उनका मुकुट नटराज की सर्वोच्चता को द्योतित करता है।
  • - छोटा व्यक्ति, वामन, जिसके ऊपर नटराज नाचते दिखाई देते हैं, वास्तव में हमारा अज्ञान और उन्मादी कार्यकलाप है। नर्तक उसका शमन करते हैं और उसके स्थान पर सुंदर लयात्मक गति को लाते हैं।

हमें भी नटराज जैसा बनना चाहिए। जीवन में जो भी परिस्थितियाँ हों, जीवन को एक उत्सव बनाना चाहिए।